भारत में देसी मुर्गी की टॉप-5 नस्लें, ताबड़तोड़ कमाई का बन सकती हैं जरिया!

desi chicken breeds in India

आगे बढ़ने से पहले जान लेते हैं कि अंडा उत्पादन के लिए देसी मुर्गी की नस्लें (Indigenous Hen Breeds) ही क्यों चुनें ? पहला कि यह भारतीय जलवायु के अनुकूल होती हैं और स्थानीय बीमारियों से लड़ सकती हैं । दूसरा, विदेशी नस्लों की तुलना में कम आहार और देखभाल की आवश्यकता होती है। तीसरा, देसी अंडों का स्वाद (Taste of Desi Eggs) और पोषण बढ़िया होता हैं जिससे ज्यादा बिक्री होती है । चौथा कि बैकयार्ड सिस्टम में भी इनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बनी रहती है और ज्यादा दिनों तक जीती हैं । अंतिम है कि देसी अंडों का बाज़ार हमेशा खुला रहता है और मनचाही कीमत मिलती है। आइये जानते हैं भारत में पाई जाने वाली टॉप-5 देसी मुर्गियों (Top 5 Indian Chicken Breeds) के बारे में ।


देशी नाटी :

इसका पालन ग्रामीण इलाकों में काफी ज्यादा किया जाता है क्योंकि इस नस्ल का मांस बेहद ही स्वादिष्ट माना जाता है, जिसके बाजार में अच्छे दाम मिल जाते हैं । कीमत लगभग 400 से 500 रुपये प्रति किलो है । Desi Nati मुर्गी  सालाना 70 से 120 अंडे दे देती है और इसे पालने का खर्चा कम है जिससे कारोबार में मुनाफा बढ़ जाता है । इसे ज्यादा देखभाल की जरूरत भी नहीं होती क्योंकि इन्हें बीमारी भी बहुत कम होती है।


कड़कनाथ :

इस नस्ल को पाल कर अच्छी आय कमाई जा सकती है, क्योंकि Kadaknath प्रीमियम क्वालिटी वाले मांस की नस्ल है । इस प्रजाति के मुर्गे की खासियत है इसका काला मांस और उच्च पोषण । कड़कनाथ मुर्गे में प्रोटीन अधिक, फैट कम और औषधीय गुण ज्यादा मात्रा में पाए जाते हैं। रंग काला होता है—पंख, त्वचा, मांस और यहाँ तक कि हड्डियाँ भी। इस नस्ल की मुर्गी साल में 80 से ज्यादा अंडे देती है ।


असील :

मूल रूप से आंध्रप्रदेश की प्रजाति Assel अपनी ताकत और सुंदरता के लिए मुर्गीपालकों की पसंद है। यह भारत की सबसे पुरानी और लड़ाकू नस्ल (fighting breed ) मानी जाती है जिसका पालन किसानों के लिए मुनाफे का सौंदा हो सकता है । अंडा उतना नहीं देती और साल में 50-70 अंडे तक ही मिल सकते हैं। इसका वजन 5 से 6 किलो तक होता है।


वनराजा :

वनराजा (Vanaraja) को देशी-विदेशी नस्ल के मिश्रण (Mixture of indigenous and foreign poultry breeds) से तैयार किया गया है, जो कम दाना भी खाकर भी अच्छा परिणाम देती है । साथ ही किसान कम पूंजी में भी इस मुर्गी का पालन कर सकते हैं । इस नस्ल की खासियत साल में 180 से 220 अंडे देने की क्षमता है । इसका वजन 2 से 3 किलो तक होता है । कम खर्च और तेजी से बढ़ना, इस नस्ल की विशेषता है ।


गिरिराज :

अगर किसान मुर्गी पालन से अच्छी कमाई चाहते हैं, तो वह गिरिराज मुर्गी (Giriraj Hen) का पालन करें क्योंकि यह नस्ल ज्यादा अंडे देने वाली देशी नस्ल है। यह किसानों की तगड़ी कमाई का जरिया बन सकती है । यह सालाना 160 से 220 अंडे देने की क्षमता रखती है । इस मुर्गी का वजन 3 से 4 किलो होता है। इनके अलावा उपकारी, हरिंगहटा ब्लैक (प. बंगाल), बुसरा (गुजरात/महाराष्ट्र) , ICAR द्वारा विकसित ग्रामप्रिया, वनक्षी व जाड़सिम जैसी नस्लें भी अंडे और मांस के लिए किफायती हैं ।

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