खेती-किसानी के साथ करें मछली पालन, मिलेगी 60% सब्सिडी औरबढ़ जाएगी आमदनी

अगर आप खेती-किसानी से जुड़े हैं और अतिरिक्त आमदनी करना चाहते हैं तो एक योजना (Fish Farming Scheme) आपके काफी काम की है। मछली की विभिन्न प्रजातियों के पालन-पोषण के लिए सरकार आर्थिक सहायता दे रही है । बिहार की मत्स्य प्रजाति विविधीकरण योजना 2025-26  के तहत माइनर कार्प (Minor Carp) और कैटफिश (Catfish) की प्रजातियों के बीज (seed) उत्पादन तथा पालन को बढ़ावा दिया जा रहा है। पूरी जानकारी इस blog में है।

 

योजना का उद्देश्य :  

देसी मछलियों की विभिन्न प्रजातियों (Various species of indigenous fish) को बढ़ावा देने के तहत ‘माइनर कॉर्प’, ‘कैट फिश’ और वायु-श्वासी मछलियों की हैचरी (बीज तैयार करने की जगह) बनाई जाएगी। बीज तैयार कर किसानों को सस्ती कीमत पर दिया जाएगा, ताकि वे मछली पालन कर सकें। इससे मछली उत्पादन बढ़ेगा, सालाना कमाई बढ़ेगी और गांवों की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी। साथ ही, नई तकनीक से जुड़कर किसान आत्मनिर्भर बन सकेंगे। इस तरह मछली पालन को पारंपरिक खेती (fish farming as traditional farming) के साथ-साथ एक लाभकारी आय स्रोत बनाने का मकसद पूरा होगा । माइनर कार्प में रेवा, बाटा, कलबासु और कैटफिश में मगुर, सिंघी व पंगास के साथ ही अन्य स्थानीय/देशी प्रजातियां भी शामिल हैं। सब्सिडी का ब्यौरा इस प्रकार है :

 

कितनी सब्सिडी ?

घटक अनुमानित लागत (प्रति इकाई) सब्सिडी
माइनर कार्प हैचरी ₹13.12 लाख 60%
कैटफिश हैचरी ₹15.37 लाख 60%
माइनर कार्प पालन इकाई ₹ 94,000.00 60%
कैटफिश एवं अन्य पालन इकाई ₹1.35 लाख 60%

 

सामान्य वर्ग को 60% तक और SC / ST / महिला लाभार्थी को 70% तक सब्सिडी (Subsidy On Fish Farming) मिलती है यानी खर्च का बड़ा हिस्सा सरकार वहन करेगी । यह सब्सिडी हर प्रोजेक्ट की तय इकाई लागत पर आधारित होगी। बाकी बची हुई राशि खुद या बैंक लोन के माध्यम से देनी होगी। सब्सिडी से केवल लागत का हिस्सा ही नहीं बल्कि तकनीकी सहायता आदि का भी लाभ मिलता है। ध्यान रहे, सिर्फ एक ही घटक (हैचरी या पालन) के लिए अनुदान मिलेगा।


लाभार्थी कौन ?

Bihar Fish Species Diversification Scheme 2025-26 के लिए सामान्य किसान, मत्स्य पालक, ग्रामीण युवा, महिला समूह और अनुसूचित जाति/जनजाति के प्रति संवेदनशील समूह (जिन्हें अधिकतर योजनाओं में प्राथमिकता दी जाती है) आवेदन के पात्र हैं। आवेदकों के पास कम से कम 0.50 एकड़ जल क्षेत्र (तालाब) होना आवश्यक है। चयन प्रक्रिया पारदर्शिता और ‘पहले आओ-पहले पाओ’ के आधार पर लागू है ।

 

दस्तावेज क्या लगेंगे ?

आधार कार्ड, निवास प्रमाण पत्र (बिहार का), जाति प्रमाण पत्र (यदि लागू हो), आय प्रमाण पत्र, बैंक खाता (पासबुक + IFSC), पासपोर्ट साइज फोटो, तालाब/जलस्रोत का कागज,  खतियान / लीज एग्रीमेंट / स्वघोषणा और प्रशिक्षण प्रमाण पत्र (यदि पहले से लिया हो) |

 

आवेदन कैसे करें ?

Bihaar Matsya Prajati Vividhikaran Yojana 2025-26 के ऑनलाइन आवेदन के लिए बिहार मत्स्य विभाग की वेबसाइट http://fisheries.bihar.gov.in खोलें । ‘योजनाएं / ऑनलाइन आवेदन’ विकल्प पर क्लिक करें । ‘मत्स्य प्रजाति विविधिकरण योजना’ चुनें। नया पंजीकरण (New Registration) करें । लॉग-इन कर आवेदन फॉर्म भरें। दस्तावेज अपलोड करें । फॉर्म सबमिट करें और रसीद/आवेदन संख्या (Acknowledgement Slip) लें, जिसे डाउनलोड या प्रिंट करके भविष्य के लिए सुरक्षित रखें।

ऑफलाइन आवेदन के लिए अपने जिले के जिला मत्स्य पदाधिकारी (DFO) कार्यालय जाएं । योजना का आवेदन फॉर्म लें । फॉर्म भरकर सभी दस्तावेज संलग्न करें।  कार्यालय में जमा करें । आवेदन की जिला स्तर पर जांच होगी और स्थल निरीक्षण (तालाब/जमीन) स्वीकृति के बाद कार्य प्रारंभ हो सकेगा । कार्य पूर्ण होने पर सब्सिडी सीधे बैंक खाते में (DBT) जाएगी ।

Refit Animal Care अपने श्रेष्ठ उत्पादों के साथ मछलीपालकों की सेवा में तत्पर है । Aqua Prime  जलीय जंतुओं मछली और झींगा के लिए एक ऐसा चेलेटेड मिनरल सप्लीमेंट (chelated mineral supplement) है जो उनकी सेहत सुधारते हुए रोग से लड़ने की क्षमता बढ़ाता है और उत्पादन में भी बढ़ोत्तरी करता है । यह खनिज की कमी की भरपाई करते हुए पाचन, पोषक तत्वों के अवशोषण के अलावा मांसपेशियों का विकास सुनिश्चित करता है।

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