मछली में फफूंद या कवक जनित रोगों के कारण, लक्षण, उपचार और रोकथाम

मछली में फफूंद या कवक जनित रोगों के कारण, लक्षण, उपचार और रोकथाम

फफूंद या सफेद कवक जनित रोग एक्वेरियम और तालाबों में मछलियों के लिए एक आम समस्या है। अगर प्रारंभिक निदान करने पर ये संक्रमण शायद ही कभी घातक होते हैं ।  फंगल संक्रमण आम तौर पर मुंह में रुई, शरीर पर कीचड़, आंखों में धुंधलापन और पंख और पूंछ के सड़ने से पता चलता हैं । यह ब्लॉग के द्वारा हम मछलियों में फफूंद जनित रोगों के कारणों, लक्षणों, उपचार और रोकथाम के बारे में विस्तृत में बात करेंगे। चाहे GOLDFISH हो या तालाब मछली हो सफेद कवक दवा, कवक उपचार और मछली के लिए कवक इलाज बहोत ही जरुरी है। कवक रोग में मछली उपचार तुरंत मुहैया कराये ।   

मछलियों में सेप्रोलिग्नीयोसिस, ब्रेकियो माइसिस जैसे रोग फफूंद जनित रोग है। 

मछलियों में फफूंद जनित रोगों के कारण:

  • तनाव (stress) मछली की प्रतिरक्षा प्रणाली (immune system) को कमजोर कर देता है, जिससे उन्हें फफूंद संक्रमण का खतरा अधिक हो जाता है।
  • तनाव पैदा करने वाले कारकों में खराब पानी की गुणवत्ता, अधिक भीड़, अनुचित आहार, परिवहन और अन्य आक्रामक मछलियाँ (टैंक मेट) शामिल हैं।
  • फफूंद के बीजाणु जो हमेशा पानी में मौजूद होते हैं, उनके लिए खुले घाव या क्षतिग्रस्त फिन और गलफड़ के द्वारा मछली के शरीर में प्रवेश करना आसान हो जाता हैं। 
  • अमोनिया स्पाइक्स, नाइट्राइट का लेवल और कम ऑक्सीजन का स्तर मछली के स्वास्थ्य को खराब कर सकता है और फफूंद के विकास को बढ़ावा दे सकता है।
  • बैक्टीरिया के संक्रमण या परजीवी से पीड़ित मछली माध्यमिक फफूंद संक्रमण के प्रति अधिक संवेदनशील होती हैं।
  • आवश्यक विटामिन और खनिजों की कमी वाला आहार मछली की प्रतिरक्षा प्रणाली (immune system) को कमजोर कर देता है।

मछलियों में फफूंद जनित रोगों के लक्षण:

  • सबसे आम लक्षण शरीर, फिन या गलफड़ों पर सफेद या भूरे रंग का पैच, रोगग्रस्त भाग पर रूई के समान गुच्छे उभर आते है।
  • जबड़े फूल जाते हैं अंधापन आने लगता है।
  • मछली कमजोर तथा सुस्त हो जाती है।
  • बीमार मछली कम मात्रा में फीड ग्रहण करती है और कभी कभी मछली बिल्कुल भी फीड ग्रहण नहीं करती है।
  • मछली पानी में बार-बार गोल-गोल घूमती है।
  • गलफड़े के संक्रमण से सांस लेने में तकलीफ होने पर मछली बार बार अपना मुंह खोलकर वायु अन्दर लेने का प्रयास करती है।
  • मछली के शरीर का रंग फीका पड़ जाता है तथा शरीर पर श्लेष्मिक द्रव के स्त्राव से उसका शरीर चिपचिपा हो जाता है।
  • फफूंद के संक्रमण के कारण मछली के मांस में खुले घाव बन जाते हैं।

मछलियों में फफूंद जनित रोगों का उपचार:

  • पानी की गुणवत्ता में सुधार करने के लिए नियमित रूप से पानी बदलें और उचित पानी के मापदंड (अमोनिया, नाइट्राइट और नाइट्रेट का स्तर, pH और तापमान) बनाए रखें।
  • ऑक्सीजन का स्तर बढ़ाना आवश्यक है ।  यदि आवश्यक हो तो एक एयर पंप को भी पानी की टंकी के साथ जोड़ दे। 
  • संक्रमित मछली को अलग रखना अति आवश्यक है । ऐसा करने से संक्रमण को फैलने से रोका जा सकता है।  यह एक सर्वोत्तम मछली कवक उपचार है। 
  • पशु चिकित्सक का संपर्क करे और उनके अनुसार एंटिफंगल दवाओं का उपयोग करें।
  • एंटिफंगल दवाओं या मछली कवक दवा को भोजन के माध्यम से या दवा को सीधे क्वारंटीन टैंक के पानी में मिलाकर मछली को दे। 
  • हल्के फफूंद संक्रमण के लिए नमक स्नान एक बहोत ही लाभदाई उपचार है।

फफूंद जनित रोगों की रोकथाम:

  • नियमित रूप से पानी बदलना, बजरी साफ करना और फिल्टर का रखरखाव फफूंद के विकास को रोकता है। 
  • छिपने के स्थानों के साथ एक विशाल टैंक प्रदान करें, अधिक भीड़भाड़ से बचें और सुनिश्चित करें कि मचिलिया एक दूसरे के साथ खाती हो।
  • अपनी मछली को उसकी प्रजाति के अनुसार उच्च गुणवत्ता वाला भोजन खिलाएं और उनकी पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए विभिन्न प्रकार के भोजन प्रदान करें।
  • बीमारी फैलने से रोकने के लिए हमेशा नई मछलियों को मुख्य टैंक में डालने से पहले कुछ हफ्तों के लिए क्वारंटीन करें ।
  • बीमारी के लक्षणों के लिए नियमित रूप से अपनी मछली की निगरानी करें और किसी भी समस्या का तुरंत समाधान करें।

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