पशुओं में रेबीज रोग के कारण, लक्षण, उपचार एवं रोकथाम

पशुओं में रेबीज रोग के कारण लक्षण उपचार एवं रोकथाम

रेबीज, लगभग 100% घातक वायरल बीमारी है जो केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (सेंट्रल नर्वस सिस्टम) को प्रभावित करती है, जानवरों और मनुष्यों दोनों के लिए ये एक बहोत बड़ा खतरा है। टीकाकरण के माध्यम से इसे काफी हद तक रोका जा सकता है| आइए पशुओं में रेबीज के कारण, लक्षण, उपचार और रोकथाम को थोड़ा विस्तार से समझें।

रेबीज का परिचय

रेबीज वायरस, लाईसावायरस (Lyssavirus) जीनस से संबंधित है, और यह गर्म खून वाले जानवरों, जिनमें स्तनधारी और कुछ पक्षी शामिल हैं, के केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (सेंट्रल नर्वस सिस्टम) में प्रवेश करता है। एक बार शरीर के अंदर जाने के बाद प्रोग्रेसिव इंफ्लमैशन (सूजन) और बादमे मृत्यु हो जाती है। अक्सर मुंह से झाग आना भी एक प्रारंभिक लक्षण है| रेबीज विभिन्न प्रजातियों में विभिन्न तरीकों से प्रकट होता है, जिससे शुरुआती पहचान को काफी कठिन बना देता है।

जानवरो को रेबीज कैसे संक्रमित करता हैं?

संक्रमित जानवर का काटना रेबीज के संचरण (ट्रांसमिशन) का कारण है। वायरस लार (saliva) में रहता है और घावों, जो काटने या खरोंच के कारण होते हैं, उनके माध्यम से जानवर के शरीर में प्रवेश करता है। जब mucous membranes (मुकुस  मेमब्रेन्स) संक्रमित लार के संपर्क में आती है  तब भी रेबीज के संक्रमण के होने की शक्यता हैं।

जानवरों में रेबीज को पहचानना – रेबीज के लक्षण

रेबीज के नैदानिक लक्षण आम तौर पर दो अलग-अलग चरणों के माध्यम से बढ़ते हैं|

  1. प्रारंभिक चरण:
  • सुस्ती, बुखार, भूख न लगना और उल्टी – यह प्रारंभिक लक्षण हैं।
  • व्यवहार में बदलाव जैसे असामान्य आक्रामकता, शर्म या अलगाव (isolation) हो सकता है।
  • जानवर असामान्य रूप से मुखर या शांत दिखाई देते हुए उनकी आवाज़ में बदलाव आ जाता हैं।
  1. दूसरा चरण:
  • पैरालिसिस अक्सर पैरों से शुरू होकर सिर की ओर बढ़ता है।
  • खाना निगलने में कठिनाई, अत्यधिक लार टपकना और दौरे (मांसपेशियों में अकड़न, मरोड़ या लंगड़ापन) देखे जा सकते हैं।

यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि ये लक्षण प्रजातियों और संक्रमण के चरण के आधार पर भिन्न हो सकते हैं। यदि आपके पालतू जानवर या किसी भी जंगली जानवर में कोई असामान्य व्यवहार या बीमारी के लक्षण दिखाई देते हैं, तो तुरंत पशु चिकित्सक से परामर्श करना महत्वपूर्ण है।

जानवरों में रेबीज की रोकथाम

सौभाग्य से, टीकाकरण के माध्यम से रेबीज को रोका जा सकता है। पालतू जानवरों जैसे कुत्तों और बिल्लियों का नियमित टीकाकरण प्रमुख तरीकों में से एक तरीका है। इसके अतिरिक्त, जंगली जानवरों के संपर्क से अपने पालतू जानवरों को बचना, पालतू जानवरों को टहलने के लिए बांधकर रखना और रेबीज से संक्रमित शवों का उचित निपटान सुनिश्चित करना आवश्यक उपाय हैं| रेबीज-ग्रस्त क्षेत्रों में पशुधन का टीकाकरण भी प्रसार को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

रेबीज का उपचार

दुर्भाग्य से, एक बार रेबीज के लक्षण दिखाई देने के बाद रेबीज का कोई इलाज नहीं है।

एक बार रेबीज के लक्षण दिखाई देने पैर आप सिर्फ रोग के फैलने की गति को धीमा कर सकते है। इसमें दर्द प्रबंधन (pain management), हाइड्रेशन और दौरे (मांसपेशियों में अकड़न, मरोड़ या लंगड़ापन) पर नियंत्रण करना शामिल हो सकता  हैं।  इसके साथ-साथ, पागल जानवर के संपर्क में आने वाले मनुष्यों और जानवरों के लिए post-exposure prophylaxis (PEP) जीवन रक्षक हो सकता है। PEP में रेबीज प्रतिरक्षा ग्लोब्युलिन (immune globulin) होता है, जो वायरस को शरीर में फैलने होने से रोक सकता है।

रेबीज से बचाव के लिए निम्नलिखित उपाय किए जा सकते हैं।

  • अपने पालतू जानवर को नियमित रूप से टीका लगवाएं |
  • टीकाकरण कार्यक्रम का पालन करें |
  • अपने पालतू जानवर को पट्टे से बांध कर रखें |
  • अपने पालतू जानवर को खुलेआम घूमने न दें |
  • अपने पालतू जानवर को किसी के भी काटने या खरोंच ने से तुरंत अपने पशुचिकित्सक से संपर्क करें |
  • अपने क्षेत्र में स्थानीय रेबीज मामलों और टीकाकरण के बारे में अपडेट रहें।

याद रखें, रोकथाम हमेशा इलाज से बेहतर है| सतर्कता ही कुंजी है| जबकि रेबीज एक गंभीर बीमारी है, इसके संचरण, लक्षणों और रोकथाम विधियों को समझना महत्वपूर्ण है। इस समझदारी से अपनी और अपने जानवर की सुरक्षा कर सकते है।

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