
आज के बछड़े कल का मुनाफा हैं, इन्हें दस्त की जानलेवा दहशत से बचाएं !
बछड़ों में दस्त ज़्यादातर संक्रमण (Infection in calves ), पर्यावरण और पोषण संबंधी तनाव आदि के कारण होते हैं। कई इन्फेक्शन, वायरल और बैक्टीरियल दस्त का कारण बन सकते हैं।

बछड़ों में दस्त ज़्यादातर संक्रमण (Infection in calves ), पर्यावरण और पोषण संबंधी तनाव आदि के कारण होते हैं। कई इन्फेक्शन, वायरल और बैक्टीरियल दस्त का कारण बन सकते हैं।

दुधारु पशुओं में आयरन (लौह) की कमी बहुत घातक है । अक्सर पशुपालक इस पर ध्यान नही देते और उन्हें आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है । इसलिए सावधान रहें और अपने बाड़े के पशुओं में किसी भी हालत में आयरन की कमी न होने दें। आयरन न सिर्फ ताकत है बल्कि पशुपालन में मुनाफे का आधार भी है ।

कई बार जानकारी की कमी या फिर लापरवाही की वजह से पशुपालकों को अपने दुधारु पशुओं से हाथ धोना पड़ जाता है । कई बीमारियां ऐसी हैं जो चुपके से दाखिल होती हैं और इलाज न होने पर बड़े जोखिम का सबब बन जाती हैं ।

अब पशुपालन से जुड़े किसानों को पशुओं में होने वाले रोगों से ज्यादा घबराने की जरूरत नहीं है । अब पशु के लक्षण देखकर सेहत से जुड़ी समस्या की पहचान आसान हो गई है।

जहां जलाशय तो हैं लेकिन मछली पालन कम होता है, ऐसी ही जगहों पर मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए एक स्कीम काफी बेहतर प्रदर्शन कर रही है ।

“पशुपालन ही किसानों की आय दुगुना कर सकता है।” देश के प्रधानमंत्री मोदी के इन्हीं शब्दों के अनुरूप मध्यप्रदेश सरकार पशुपालन को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की धुरी बनाने के लिए कई योजनाएं संचालित कर रही है।

भारत में लगभग 80 मिलियन अर्थात 8 करोड़ से अधिक परिवार पशुपालन और डेयरी क्षेत्र से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हैं। इनमें से 70 मिलियन यानी 7 करोड़ से अधिक किसान सीधे तौर पर जुड़े हैं

सड़कों पर घूम रही गायों की समस्या का समाधान करना, उनसे फसलों और लोगों की सुरक्षा, स्वदेशी गोवंश नस्ल को बढ़ावा देना |

उत्तर प्रदेश सरकार लगातार पशुपालन से जुड़े किसानों की भलाई के लिए कई योजनाएं चला रही है ।

बकरी पालन एक ऐसा व्यवसाय है, जिसमें कम लागत में अधिक मुनाफा कमाया जा सकता है। बकरियों से दूध, मांस और गोबर जैसे कई उत्पादों से कमाई हो सकती है ।